छत्तीसगढ़

प्रदेश के जांजगीर चांपा लोकसभा क्षेत्र में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार 

By: हरिमोहन तिवारी
2019-04-21 12:08:14 PM
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प्रदेश के जांजगीर चांपा लोकसभा क्षेत्र में त्रिकोणीय मुकाबले के आसार 
 

रायपुर - राज्य में 23 अप्रैल को तीसरे चरण में जांजगीर चांपा संसदीय सीट पर मतदान होगा भाजपा से गुहाराम अजगले कांग्रेस से रवि परसराम भारद्धाज और बसपा से दाऊराम रत्नाकर सहित 15प्रत्याशी चुनाव मैदान में है, भारतीय जनता पार्टी में प्रदेश के सभी वर्तमान सांसदों के टिकट काटे और वर्तमान सांसद कमलादेवी पाटले की जगह 2004में सांसद रहे गुहाराम अजगले को उम्मीदवार बनाया, 2014 के चुनाव में 48.34 प्रतिशत पाकर कमला देवी पाटले ने 32.4 प्रतिशत वोट पाने वाले कांग्रेस के प्रत्याशी प्रेमचंद जायसी को हराया था 2009 के चुनाव में श्रीमती पाटले ने प्रदेश के वर्तमान मंत्री शिव डहरिया को शिकस्त दी थी, तब पाटले को 40.96 प्रतिशत और शिव डहरिया को 29.14प्रतिशत वोट मिले थे। 2009के मुकाबले 2014में कमला देवी पाटले की लोकप्रियता बढ़ी थी फिर भी लोग 2019में टिकट से वंचित रह गई। कांग्रेस ने सारंगढ़ के पूर्व सांसद एवं पूर्वकार्यकरी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष स्व. परसराम भारद्धज के पूत्र रविपरसराम भारद्धज के पुत्र को मैदान में उतारा है लगातार ६ बार सांसद रहे परसराम भारद्धज के कारण रविभारद्धज की पहचान बनाने का संकट नहीं बसपा ने इस बार अविभाजित मध्यप्रदेश के पार्टी के अध्यक्ष रहे दाऊलाल रत्नाकर को चुनावी मैदान में उतारा है। इस लोकसभा के २ विधानसभा क्षेत्र पामगढ़ और जैजेपुर में बसपा के विधायक है एवं अकलतरा व बिलाईगढ़ में बसपा दूसरे नंबर पर थी। अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित जांजगीर चांपा की सीट में बसपा अपने परंपरागत अनुसूचित जाति वोट बैंक के सहारे चुनाव को त्रिकोणीय संघर्ष में बदलने में सक्षम दिख रही है।

जांजगीर-चांपा लोकसभा सीट पर 1952 से लेकर अब तक 16 चुनाव हो चुके हैं. साल 1999 तक यह निर्वाचन क्षेत्र मध्य प्रदेश के हिस्से में आता था. साल 2004 के चुनाव से यह छत्तीसगढ़ का हिस्सा बन गया. इसके बाद यहां हुए पिछले तीनों चुनाव बीजेपी ने जीते हैं. छत्तीसगढ़ की जांजगीर-चांपा लोकसभा सीट एसससी वर्ग के लिए आरक्षित है. जिला जांजगीर-चाम्पा की स्थापना 25 मई 1998 को हुई थी. यह जिला छत्तीसगढ़ के केंद्र में स्थित है और इसलिए इसे प्रदेश का दिल माना जाता है। पहले ये संसदीय सीट सारंगढ़ के नाम से जाना जाता था, लेकिन परीसीमन के बाद इसे जांजगीर चांपा के नाम से पहचाने जाने लगा।
जांजगीर-चांपा जिला छत्तीसगढ़ राज्य में खाद्यान्न का एक प्रमुख उत्पादक है. जांजगीर-चांपा का मुख्यालय जांजगीर कलचुरी वंश के महाराजा जाज्वल्य देव की नगरी है. हसदेव प्रोजेक्ट को जिले के लिए काफी अहम माना जाता है. इस प्रोजेक्ट के तहत जिले के तीन चौथाई इलाके को सिंचाई का पानी मुहैया होता है।

2009 में गुहाराम अजगले की टिकट भाजपा ने काट दी थी, आरोप निष्कृयता और यूपीए सरकार के प्रथम कार्यकाल में विश्वास प्रस्ताव के साथ पार्टी निर्देशों की अवहेलना का था, 2019 में फिर से अजगले उम्मीदवार है। ऐसे में पाटले समर्थक अजगले के लिए इमानदारी से काम करने के लिए इसमें संशय है भाजपा कार्यकर्ता गांव गांव जाकर नरेन्द्र मोदी के नाम पर वोट मांग रहे हैं।
रवि परसराम भारद्धाज कांग्रेस के न्याय स्कीम और राज्य सरकार द्वारा किये गये कार्याे के भरोसे मतदाताओं से अपने पक्ष में मतदान करने की अपील कर रहे हैं। कांग्रेस पर लगने वाले वंशवाद के उदाहरण के रूप में देखी जा रही उनकी उम्मीदवारी उनके लिए विजय के द्वार खोलेगी यह कह पाना थोड़ा कठिन है।

दाऊराम रत्नाकर पूर्व विधायक है क्षेत्र में उनकी अपनी पैठ हैं, पूर्व विधायक है, पूर्व बसपा प्रदेश

अध्यक्ष रहे अविभाजित मध्यप्रदेश के समय से प्रदेश में बसपा और राजनीति में सक्रिय हैं। बसपा के परंपरागत वोटों से मुकाबले का त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में लगे हैं।
अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित जांजगीर चांपा लोकसभा क्षेत्र मे अनुसूचित जाति के वोटों का बंटवारा तीनों प्रत्याशियों के बीच होना तय है, बसपा और कांग्रेस अपने इस परंपरागत वोट को अपनी ओर करने में पुरजोर करने में लगे है। अनुसूचित जाति के वोटो का पलड़ा यदि थोड़ा बसपा की तरफ झुका तो भाजपा अपनी राह असान कर लेगी परंपरागत रूप से इस लोकसभा सीट पर भाजपा कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला होते आया है और पिछले तीन लोकसभा चुनाव से भाजपा यहां से विजयश्री वरण करते आई है। दाऊराम रत्नाकर की उम्मीदवारी की वजह से इस बार त्रिकोणीय संघर्ष के आसार दिख रहे है।

जांजगीर-चांपा लोकसभा के अंर्तगत छत्तीसगढ़ विधानसभा की 8 सीटें  आती हैं, जिनमें अकलतरा, चंद्रपुर, बिलाइगढ़ (एससी), जांजगीर-चांपा, जयजयपुर, कसलडोल, सक्ती, पामगढ़ (एससी) शामिल हैं।



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