छत्तीसगढ़

चौकीदारों के नाम पर देश भर में राजनीति की जा रही हैं। पर वास्तविक चौकीदारों को कोई पूछने वाला नही हैं।  शाला में पदस्थ महिला भृत्य चौकीदार को 2 साल से नही मिल रहा मासिक वेतन

By: हरिमोहन तिवारी
2019-04-07 02:52:04 PM
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चौकीदारों के नाम पर देश भर में राजनीति की जा रही हैं। पर वास्तविक चौकीदारों को कोई पूछने वाला नही हैं।
 शाला में पदस्थ महिला भृत्य चौकीदार को 2 साल से नही मिल रहा मासिक वेतन

 

 
रायपुर पूरे प्रदेश में लोकसभा चुनाव में सियासत में बने चौकीदार सोशल मीडिया पर छाए हुए हैं। किसी मे अपने नाम के आगे चौकीदार लिखवा लिया तो किसी ने लिखा हाँ “मैं भी चौकीदार”। प्रधानमंत्री के खुद को चौकीदार कहने से शुरू हुआ सिलसिला गांव, गली तक के भाजपा नेता तक पहुच गया हैं। लेकिन जिन चौकीदारों के नाम पर देश भर में राजनीति की जा रही हैं। उन वास्तविक चौकीदारों को कोई पूछने वाला नही हैं।

नेताओं के लिए तो चौकीदार सिर्फ चुनावी टैगलाइन ही हैं। पर सरकारी अमले के पास भी जिले में काम करने वाले चौकीदारों व भृत्य की संख्या या उनसे संबंधित कोई जानकारी नही है। इतना ही नही अपनी समस्या और परेशानी से जूझ रहे कुछ चौकीदार तो प्रशासन से लेकर शासन और और पीएमओ तक कि शिकायत कर चुके है लेकिन आज तलक इनकी मांग पूरी नही हुई।

जिला मुख्यालय स्तिथ शासकीय बेसिक शाला मिडिल स्कूल में पिछले 17 वर्षों से भृत्य के पद में कार्यरत कमला बाई शनिवार को पीएम नरेंद्र मोदी से मिलने सभास्थल में पहुची। जहां वो पीएम से मिलकर अपनी समस्या से अवगत कराना चाहती थी। लेकिन कमला बाई अपनी समस्या से अवगत पाती तब तक पीएम रवाना हो चुके थे। कमला बाई बार-बार यह कहती रही कि “मुझे पीएम से मिलना है”, “मुझे पीएम से मिला दो”।

  कमला बाई से उसकी समस्या पूछी। तो भृत्य कमला बाई ने बताया कि उसे विगत 2 साल से वेतन नही मिल पा रहा है। जिसकी शिकायत वह प्रशासन से लेकर शासन, सचिव छग शासन स्कूल शिक्षा विभाग व पीएमओ तक कर चुकी हैं।

कमला बाई ने आगे बताया कि उन्हें मार्च 2016 तक वेतन दिया गया है, तात्कालिक जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा बिना किसी कारण के वेतन को मार्च 2016 से अब तक रोक दिया गया हैं। जिसकी शिकायत कलेक्टर जनदर्शन से लेकर मुख्यमंत्री के जनदर्शन तक कर चुकी हूं। जबकि बिना वेतन के अब तक अपने कर्तव्य का निर्वहन पूरी निष्ठा से कर रही हूं।


विगत 2 सालों से वेतन नही मिल पाने की वजह से बेहद गंभीर आर्थिक संकट आ गया है। तथा बच्चों के पालन पोषण में असमर्थ होते जा रही हूं। कमला बाई सोनार पति स्वर्गीय सोमन सोनार आमापारा वार्ड-13 निवासी ने आगे बताया कि 600 रुपये वेतन मिलता रहा है। विगत 17 साल से मैं बेसिक शाला में भृत्य के पद पर नौकरी कर रही हूं। नियमित भृत्य के पद पर पदांकन करने की ही मांग कमला बाई ने की हैं।



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