छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के इस अस्पताल में नवजात शिशुओं के होता था खरीद फरोख्त

By: हरिमोहन तिवारी
2019-03-24 04:04:01 PM
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प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में चल रहा था नवजात के खरीद फरोख्त का कारोबार  पुलिस ने 
 बच्चे का सौदा करते मां सहित दो महिलाओं और 1 पुरुष को धर दबोचा 

मां सहित 2 महिला और 1 युवक को दबोचा

 

रायपुर: प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल मेकाहारा में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने दूध में बच्चे का सौदा करते मां सहित दो महिलाओं और 1 पुरुष को धर दबोचा है बताया जा रहा है कि पुलिस की गिरफ्त में आई 2 महिलाएं दलाल हैं, जो लंबे समय से ऐसे कारोबार में लिप्त है।

मिली जानकारी के अनुसार बलौदाबाजार निवासी महिला दो महीने पहले अंबेडकर अस्तपताल में गर्भपात कराने आई थी। इसी दौरान उसकी मुलाकात एक अन्य महिला से हुई। उसने गर्भपात कराने आई महिला को गर्भपात न कराने की सलाह देते हुए अपने साथ ले गई। महिला ने पुरानी बस्ती में गर्भवती महिला को रखकर उसकी देखभाल की।

इसके बाद 9 मार्च को अम्बेडकर अस्पताल में बच्चे के जन्म के बाद, नवजात की मां और उक्त महिला ने रूपा नाम की दूसरी महिला के साथ मिलकर बच्चे को महासमुंद  सरायपाली के दो युवकों भूपेश माखिजा और संजय को 50 हजार में बेच दिया।

मामले का खुलासा तब हुआ जब महिला बाल विकास विभाग को जब इस गोरखधंधे की भनक लगी और उन्होंने इसकी शिकायत मौदहापारा थाने में की। शिकायत के बाद हरकत में आई मौदहापारा पुलिस ने जांच के बाद बच्चे की मां के साथ दो अन्य आरोपी महिलाओं और युवकों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

 

 

 

यह है किराए की कोख
सरोगेसी गर्भधारण करने में असमर्थ महिला के लिए संतान सुख का जरिया है। महिला के अंडे और पुरुष के शुक्राणु के निषेचन के बाद भ्रूण को किसी अन्य स्त्री के गर्भ में रखा जाता है। स्त्री की कोख को किराए पर लिया जाता है।

यह है नुकसान
डॉक्टरों के मुताबिक नवजात को 6 महीने तक मां का दूध और निकटता की जरूरत होती है, लेकिन सरोगेट मदर से जन्मे बच्चे को मां का दूध कभी नसीब नहीं होता। बच्चे व मां को भावनात्मक संकट से भी जूझना होता है।



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