छत्तीसगढ़

घरघोड़ा में साहित्यकारों ने शहीद वीर जवानों को अश्रुपूरित श्रद्धांजली दिये

By: सतधनु सारथी
2019-02-25 07:24:10 PM
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घरघोड़ा में साहित्यकारों ने शहीद वीर जवानों को अश्रुपूरित श्रद्धांजली दिये

 घरघोड़ा :- अनुविभागीय तहसील घरघोड़ा के खाल्हेपारा में विराजमान सिद्ध माँ बैगिन डोकरी प्राचीन मन्दिर के ठीक सामने वाला सामुदायिक भवन में गत् दिवस को सायं काल 06 बजे से 09 बजे तक अंचल के ख्यातिलब्ध साहित्यिक संस्था " नवोन्मेष रचना मंच " के बैनर तले तमनार , रायगढ़ व घरघोड़ा के साहित्यकारों ने मिलकर संयुक्त रूप से काव्यमय श्रद्धांजली सभा का आयोजन किये। 
आयोजन के मुख्य अतिथि तमनार के जनकवि प्रो. प्रफुल्ल पटनायक जी , अध्यक्ष युवाकवि व पत्रकार प्रताप नारायण बेहरा जी , अंचल के वरिष्ठ जन शंखदेव मिश्रा जी व पत्रकार श्याम भोजवानी जी विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थे ।
प्रथम चरण में उपस्थित सभी साहित्यकारों द्वारा पुलवामा हमले में शहीद वीर जवानों को केंडल जलाकर , पुष्पांजली अर्पित करके भावभीनी अश्रुपूरित श्रद्धांजली दी गई । भारत माता की जय , वीर शहीद अमर रहें , जय हिन्द के नारों से सदन गुंजायमान हो गया ।
द्वितीय चरण में आगंतुक साहित्यकारों ने अपने लेख , काव्य , गीत , गजल व नज्म से देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजली दिये ।
श्रद्धांजली सभा के बहाने बोलते हुये जनकवि प्रफुल्ल पटनायक जी ने कहा - "सरकार कहती है कोई ठोस कदम उठाया जायेगा पर वह भाषणों तक ही सीमट कर रह जाता है" । युवाकवि प्रताप नारायण बेहरा जी ने कहा - "आज देश में आँसू ही आँसू है , मैं गीत प्रेम की कैसे गाऊं" । 
पड़िगाँव से पधारे बालकवि प्रमोद सोनवानी पुष्प ने कहा - "हो गया विनाश रे , हुये सब अनाथ रे । रो रही है माँ भी , रो रहा है गाँव भी । करके छलनी सीनें को , सो गया है तू ।। देश के ओ लाल मर मिटा है तू .. वीरगति पा गया है तू ...।।"
वरिष्ठ कवि डॉ. दिलीप गुप्ता ने कहा - "अब हम कितने सहादत देंगे , अब जान नहीं देंगे सिर्फ जान लेंगे" । कवि संतोष पैंकरा जी बच्चों के मनोभाव से कहे - "दाई मोला डंडा दे दे पाकिस्तान ला मारहूँ , जम्मो दिन के गुस्सा ला येकेच दिन उतारहूँ " । गीतकार प्रो . संजय बहिदार ने शहीदों के परिवार वालों की पीड़ा को रेखांकित किये । गजलकार जयशंकर डनसेना ने जल जंगल जमीन के समस्या को सरहद से तुलना किये । 
इसी क्रम में राजेंद्र गुप्ता , उग्रसेन स्वर्णकार , रूखमणी सिंह राजपूत , सुमन अग्निहोत्री , पूनम चौहान , इश्क शर्मा , राघवेन्द्र रुहेल , प्रकाश दास मानिकपुरी , राधेश्याम यादव  व कन्हैया परिहाड़ी आदि ने अपनी अपनी प्रतिनिधि कविताओं का पाठ करके अमर सपूतों को शत् शत् नमन किये ।
अंत में आभार प्रदर्शन संतोष पैंकरा जी द्वारा किया गया । कुशल मंच संचालन डॉ . दिलीप गुप्ता जी ने किया ।
उक्त आयोजन को सफल बनाने में पैंकरा बंधु पप्पू , सुरेन्द्र , पुष्पेन्द्र व राजेश ठाकुर जी की भूमिका स्मरणीय रही ।
आयोजित काव्यमय श्रद्धांजली सभा में कवि , लेखक , वक्ता , समाजसेवी , पत्रकार व गाँव के प्रबुद्ध जनों की उपस्थिति रही ।
वस्तुतः पुलवामा हमले से हर भारतीय के ह्रदय में गुस्सा फुट पड़ा है। अब हर मन कह रहा है " सीमा पर मैं जाऊँगा , हर दुश्मन से लोहा लेकर । उनको मजा चखाऊंगा ।। "



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