छत्तीसगढ़

भ्रष्टाचार का 'मॉडल' स्कुल…. मॉडल स्कूल के लिए स्कूलों को खरीदना था समान, अफसरों ने कमीशन के चक्कर में ठेकेदार से करवा दी सप्लाई

By: Aditya Tripathi
2019-02-24 03:44:59 PM
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रायपुर. छत्तीसगढ़ के जशपुर प्राइमरी स्कूलों को मॉडर्न बनाने की कलेक्टर की नेक पहल को अफसरों ने इस कदर पलीता लगाया….कि मॉडल स्कूल “भ्रष्टाचार का ही मॉडल ” बन गया। स्कूलों को आधुनिक बनाने के लिए जो समान स्कूलों को अपनी सहुलियत के मुताबिक खरीदना था…वो खरीदी अफसरों ने दवाब बनवाकर ठेकेदारों से खरीदवा दी। आलम ये हुआ कि 100 रुपये का सामान 500 में खरीदा गया और ऊलूल-जुलूल बिल स्कूलों को थमा दिया गया। बिल देखकर प्रधान पाठकों के होश उड़े गये हैं…लिहाजा शिकायतें अब आला अधिकारी तक पहुंच गयी है।

 

दरअसल हुआ यूं था कि तत्कालीन कलेक्टर ने शासकीय प्राथमिक स्कूलों को निजी स्कूल की तरह भौतिक सुविधा प्रदान करने हेतु जिले में पायलट प्रोजेक्ट के तहत 49 स्कूलों का चयन किया था। जिन्हें मॉडल स्कूल के रूप में डेवलप करना था। चयनित प्रत्येक स्कूलों के लिए 1 लाख 82 हजार रु की राशि DMF से जारी भी गई थी, PFMS भवन की रंगाई-पोताई के लिए 35 हजार, डेस्क-बेच के लिए 75 हजार, टीवी के लिए 20 हजार, विद्युत कलेक्शन हेतु 5 हजार, जूता-मोजा, टाई-बेल्ट-बैच हेतु 25 हजार, गैस चूल्हा, सिलेण्डर हेतु 5 हजार, थाली हेतु 5 हजार, परिचय पत्र एवं खेल सामग्री हेतु 2500, हार्ड डिस्क हेतु 5 हजार, वाटर प्यूरी फ़िल्टर हेतु 5 हजार रूपये के हिसाब से प्रधान पाठकों एवं शाला समिति के सदस्यों द्वारा खरीदना था।

 

इतनी बड़ी रकम देखकर अधिकारियों की आंखें ललचा गयी और “शिक्षा के मंदिर में भ्रष्टाचार के पाप की” ऐसी लीला हुई कि सुनकर, मां सरस्वती भी शरमा जायेगी। कांसाबेल विकासखंड के स्कूलों के लिए बिना प्रधान पाठक को विश्वास में लिए और बिना उनकी इजाजत के DEO व BEO दफ्तर के अधिकारी व कर्मचारी मनमाने तरीके उसकी खरीदी शुरू करवा दी। पूरे काम के लिए अंबिकापुर के लिए देवसर मार्केंटिंग को जिम्मा दे दिया गया। जबकि नियम के मुताबिक स्कूलों को शाला समिति के सहयोग से अपनी उपयोगिता की चीजें खरीदनी थी।

 

जाहिर है पूरा मामला कमीशन का खेल था। बिना पूर्व सूचना के देवसर मार्केटिंग ने स्कूलों में जा-जाकर समानों की सप्लाई कर दी वहीं स्कूलों में रंग रोगन का काम भी करवा दिया। पहले तो स्कूलों को माजरा समझ नहीं आया, लेकिन बाद में जब लंबा चौड़ा बिल देखा तो होश ही स्कूलों के शिक्षकों के उड़ गये। महज 18 बाई 11 के कमरे की पुट्टी,पेंटिंग के लिए 35 हजार तथा डेस्क बेंच जो की निर्धारित राशि से कहीं ज्यादा 91 हजार का बिल संस्था प्रमुखों को थमाया गया है तथा बिल भुगतान हेतु दबाव बनाया जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पत्थलगांव छोड़कर अन्य सभी 6 विकासखंड में इसी प्रकार का खेल खेला गया है ।गुणवत्ताहीन सामानों को लेकर सभी प्रधान पाठकों ने मोर्चा खोल दिया है.जिसके सम्बन्ध में कुनकुरी विधायक यूडी मिंज को सूचना दे दी गई है। इधर बिल के भुगतान के लिए अफसर की तरफ से लगातार स्कूलों को दवाब बनाया जा रहा है।

 इस मामले में जशपुर कलेक्टर  नीलेश क्षीरसागर ने बताया कि  इस मामले में जिन विषयों की शिकायत की जानकारी दी गयी है, उस पर पूरी रिपोर्ट मंगाकर मामले पर प्रशासन तत्काल संज्ञान लेगा और इस पर जरूर कार्रवाई होगी।



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