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सारंगढ: लटकते ताले! सोते रहे अधिकारी...जंगल का खजाना आर-पार, मीडिया के हस्तक्षेप के बाद जवाबदेही अधिकारी झाड़ रहे पल्ला

By: सतधनु सारथी
2019-02-21 11:20:36 AM
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रायगढ़/सारंगढ़। छत्तीसगढ़ की वन संपदा छत्तीसगढ़ की उन्नन्त गौरव की गाथा है, छत्तीसगढ़ की वनसंपदा,वन्यजीव से ही भारत की पहचान की जाती है और इस पहचान को निरंतर बनाए रखने के लिए राज्य एवं केंद्र सरकार निरंतर कार्यरत रहती है।

अभयारण्य एवं जंगल के बचाव के लिए केंद्र सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा निश्चित रूप से संरक्षित पहल की जाती रही है. लेकिन क्या कहा जाए जो सरकार के द्वारा बनाए गए अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते नजर आए एवं जिन्हें अपनी जवाबदारी का कोई एहसास ना हो। जी हां पूरा मामला रायगढ़ जिले के सारंगढ तहसील से जुड़ा हुआ है।

सारंगढ तहसील के अंतर्गत आने वाले अभ्यारण्य  विभाग में घोर लापरवाही तब देखने को मिली जब विभाग द्वारा बनाए गए क्वार्टर में ताला लटका हुआ एवं बेरिया खुली पाई गई गरिमत की बात तो तब हो गई जब 100 मीटर की दूरी पर बीट गार्ड नाका मदन सिंह ठाकुर ने यह कहते हुए बात को टाल दिया कि यह क्षेत्र मेरे अंदर में नहीं आता जब हमारी मीडिया की टीम ने उसके ऊपर के अधिकारी दरोगा जितेंद्र सिंह को फोन के माध्यम से बात की तो दरोगा जितेंद्र सिंह ठाकुर का कहना था इसकी पूरी जिम्मेदारी मदन सिंह ठाकुर की है। जो वर्तमान में उस क्षेत्र को देख रहे हैं।

जब यह बात बिट गार्ड मदन सिंह ठाकुर को कहीं गई तो मदन सिंह ठाकुर ने कहा जितेन सिंह ठाकुर अपने आप को बचाने के लिए पल्ला झाड़ रहे हैं। पूरे मामले को जब हमारी टीम द्वारा विस्तृत रूप से जानकारी हेतु सारंगढ रेंजर गंडेचा से बात करने पर उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा इसकी संपूर्ण जवाबदारी उक्त अधिकारी की है। लेकिन सवाल तो तब खड़ा हो जाती है।

जब एक ओर राज्य सरकार जंगल बचाने के लिए निरंतर प्रयास करते हुए जंगल में रहने वाले जानवरों को संरक्षण देने के लिए निरंतर प्रयासरत है। लेकिन अधिकारियों का पल्ला झाड़ना कब तक उच्च अधिकारियों की पल्ले पड़ती है कहा नही जा सकता है। इस तरह की लापरवाही से अभयारण्य विभाग की लापरवाही की बात स्वीकार की जा सकती है की मदन सिंह ठाकुर का रवैया एवं रेंजर जितेंद्र ठाकुर का बयान निश्चित तौर पर अभयारण्य विभाग की लापरवाही का सबब बना हुआ है।

बीते दिनों की कुत्ते के काटने से सांभर की मौत एवं जंगल के कुख्यात अपराधियों से जानवरों की दुर्गति निश्चित तौर से सवालिया खड़ा करती है,और यह दर्शाती है कि इन सब का कारण अभ्यारण्य विभाग एवं जंगल विभाग की संपूर्ण जवाबदारी है इस हेतु उच्चाधिकारी को यह जवाब देना आवश्यक पड़ जाता है कि उनके नीचे के अधिकारी किस पद पर पदस्थ होकर अपने जवाबदारी का निर्वहन करते हैं।बहरहाल उक्त समय को देखते हुए पूरी घटना उच्च अधिकारी को प्रेषित कर दी गई है। लेकिन सवाल अब भी है कि जिम्मेदार अधिकारीयों का यू ही पल्ला झाड़ना उनका आदत बना रहेगा।



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