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धान बेचने भटक रहा किसान, पिता की मृत्यु के बाद पुत्र लगा रहा तहसील के चक्कर...तीन माह बाद भी ऋण पुस्तिका में परिवर्तन नहीं!

By: डीएनए न्यूज़। महासुमन्द
2018-12-16 09:16:07 PM
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  • तहसीलदार के निर्देश के बावजूद समिति में नहीं हो रही है उनके धान की खरीदी 

महासमुंद/सरायपाली. एक किसान की मृत्यु उपरांत उनके नाम की जमीन को अपने नाम से करवाने के लिए पुत्रों को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है. मामला ग्राम बेलटिकरी(बड़ेसाजापाली) का है. जहाँ पिता की मृत्यु के बाद फौती कटवाने एवं आवश्यक दस्तावेज जमा करने के तीन माह बाद भी उनके पुत्रों के नाम से ऋण पुस्तिका परिवर्तन नहीं हुआ है, जिससे वे धान खरीदी प्रारंभ होने के डेढ़ माह बाद भी अब तक अपना धान नहीं बेच पाये हैं.

नाम परिवर्तन के लिए उनके पुत्रों द्वारा समिति से लेकर तहसीलदार तक सभी दस्तावेज दे चुके हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही दिया जा रहा है. धान कटाई, मिंजाई एवं अन्य खेती कार्य में लगे मजदूरों को राशि भुगतान करने के लिए अब उन्हें काफी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. 

ग्राम बेलटिकरी निवासी चिंतामणी पटेल द्वारा तहसीलदार को दिए आवेदन में उल्लेख किया गया है कि उनके पिता नरसिंग पटेल की मृत्यु 20 सितंबर 2018 को हो गई थी. मृत्यु के उपरांत उनका मृत्यु प्रमाण पत्र एवं जमीन के आवश्यक दस्तावेज लेकर फौती भी कटवाया गया और नामांतरण के लिए तहसील कार्यालय में आवेदन भी दिया जा चुका है.

तहसील कार्यालय के द्वारा समिति को लिखित में नियमानुसार फौती दर्ज होने के बाद उनके वारिसों के नाम पर धान खरीदी किये जाने का निर्देश दिया गया है. इसके बावजूद जब आवेदक किसानों द्वारा अपने धान खरीदी केन्द्र बड़ेसाजापाली में तहसीलदार द्वारा लिखित आदेश एवं आवश्यक दस्तावेज को जमा किया गया तो भी उन्हें केवल तारीख पर तारीख ही दिया जा रहा है और खरीदी प्रारंभ होने के डेढ़ माह बाद भी उनके धान को अब तक नहीं खरीदा गया है.

जिससे किसान काफी चिंतित हैं और उनके धान की खरीदी नहीं होने पर उन्होंने आत्मदाह तक करने की चेतावनी समिति प्रबंधक को दी है. किसान के छोटे पुत्र रामनाथ पटेल ने बताया कि उनका 17 एकड़ जमीन है, जिसमें कर्ज भी लिया गया है. वे लोग विगत 20 वर्षों से समय पर कर्जा पटाते भी आ रहे हैं. एक बार भी डिफाल्टर नहीं हुए हैं.

अभी भी कर्ज पटाने के लिए वे तैयार हैं, लेकिन समिति कर्मचारियों की लापरवाही के कारण उन्हें धान बेचने से वंचित किया जा रहा है. धान कटाई, मिंजाई, ढुलाई व अन्य कार्यों के लिए ब्याज में पैसे लाकर मजदूरों को देना पड़ रहा है. किसान के लिए एकमात्र सहारा धान ही है और जब धान की ही बिक्री न हो तो किसानों के पास आवक का अन्य कोई  साधन ही नहीं होता. प्रति सप्ताह कई बार वे धान खरीदी केन्द्र में नाम परिवर्तन के संबंध में पूछने के लिए आते हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिलता है.

 

क्या कहा समिति प्रबंधक ने 

समिति प्रबंधक हरेकृष्ण बंजारे बड़ेसाजापाली से पूछे जाने पर उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय सूचना प्रोद्योगिकी महासमुंद के साफ्टवेयर में आॅनलाईन संशोधित होना बंद है. मृतक के बड़े पुत्र का स्वयं के नाम पर ऋण पुस्तिका है, जिसका पंजीयन भी हो चुका है और उसमें वे धान भी बेच रहे हैं. मृतक का नामांतरण लंबरदार बड़े पुत्र के नाम से ही आता है. ऐसे में एक ही नाम का दो पंजीयन नहीं हो पा रहा है, जिसके कारण इनके नामांतरण में समस्या आ रही है. 



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