महासमुन्द

कुपोषण मुक्ति अभियान की सच्चाई महिला एवं बाल विकास विभाग से मिले आंकड़ों से सामने आ गई सबसे जादा कुपोषण बच्चे इस ब्लॉक में

By: हेमन्त वैष्णव
2018-12-09 10:42:59 AM
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कुपोषण मुक्ति अभियान की सच्चाई 

महिला एवं बाल विकास विभाग से मिले आंकड़ों से सामने आ गई सबसे जादा कुपोषण बच्चे बसना ब्लॉक में

महासमुन्द जिले में अब भी 5469 बच्चे कुपोषण के शिकार हैं।

महासमुंद. महासमुंद जिले में चलाए गए कुपोषण मुक्ति अभियान की सच्चाई महिला एवं बाल विकास विभाग से मिले आंकड़ों से सामने आ गई है। अब भी 5469 बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। सुपोषण अभियान से भी यह आंकड़ा कम नहीं हो रहा है।

 

आंकड़ों के सामने आने के बाद अफसरों का तर्क यह है कि बच्चों के खान-पान को लेकर पालकों को जागरूक किया जा रहा है। कुपोषित बच्चों की संख्या भी घट रही है। इधर, स्थिति बिल्कुल उलट है। यानी साफ है कि बच्चों को सुपोषित करने के लिए बेहतर प्रयास नहीं किए जा रहे हैं, न ही बेहतर इलाज की सुविधा मिल रही है।

 

ज्ञात हो कि कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने की योजना को लेकर बैठकें होती रहती हैं। अभियान भी चलाया जाता है, पर नतीजा सिफर है। जिले में 1795 आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इनमें 1735 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता हैं और 1570 सहायिकाएं कार्य कर रही हैं। बड़ी बात यह है कि जिन जगहों पर अफसरों का डेरा है, वहां के बच्चे कुपोषण के शिकार हैं और अफसरों की नजर इन पर नहीं पड़ रही है।

ऐसे में कुपोषण मुक्त जिला बनाने की परिकल्पना कोसों दूर नजर आ रही है। बच्चों को पर्याप्त पोषण आहार नहीं मिल रहा है। गंभीर कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए एनआरसी सेंटर भी बने हैं। आंगनबाड़ी के बच्चों में खून की कमी, त्वचा, आंख, पेट रोग से संबंधित बीमारियां सामने आ रही हैं। वजन त्योहार के दौरान 81996 बच्चों का वजन लिया गया। इसमें ५८४०३ बच्चे नॉर्मल वेट, मध्यम वेट 18121 और 5469 बच्चों का वेट कम पाया गया।

गौरतलब है कि कुपोषित बच्चों को सुपोषित करने के लिए तरह-तरह के अभियान पूर्व में भी चलाए जा चुके हैं, इनमें गोद लेकर सुपोषित करना शामिल है, जिसका कोई असर नहीं दिख रहा है। मजबूरी में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को ही बच्चों को गोद लेना पड़ रहा है। अब कुछ दिनों बाद फिर से अभियान चलाकर कुपोषित बच्चों की जांच की जाएगी। देखना यह भी है कि आंकड़ा कितना कम होता है।

बसना में ज्यादा कुपोषित

बसना विकासखंड में सबसे ज्यादा बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। यहां 1223 बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। पिथौरा में 1157, सरायपाली में 1093, बागबाहरा में 903, महासमुंद ग्रामीण में 866, महासमुंद (शहरी) में 227 बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। इनके लिए सुपोषण अभियान चलाया जा रहा है। ज्ञात हो कि शिशु संरक्षण माह 21 दिसम्बर 2018 से 25 जनवरी 2019 के बीच आयोजित किया जाना है। इसके अंतर्गत सभी टीकाकरण केन्द्रों में मंगलवार एवं शुक्रवार को सुबह 9 से शाम 4 बजे तक सेवाएं प्रदान की जाएंगी। इस दौरान बच्चों में कुपोषण की जांच की जाएगी और आवश्यकतानुसार उन्हें पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती करते हुए सुपोषित किया जाएगा।



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