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महासमुन्द कस्टम मिलिंग की रफ्तार धीमी, 42 हजार क्विंटल चावल जमा कर चुके राइस मिलर

By: डीएनए न्यूज़ महासमुन्द
2018-12-01 10:45:32 AM
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कस्टम मिलिंग की रफ्तार धीमी, 42 हजार क्विंटल चावल जमा कर चुके राइस मिलर

महासमुन्द डीएनए न्यूज़

समर्थन मूल्य में धान की खरीदी के साथ कस्टम मिलिंग की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। 42 हजार क्विंटल चावल राइस मिलर जमा करा चुके हैं।

महासमुंद. समर्थन मूल्य में धान की खरीदी के साथ कस्टम मिलिंग की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है। 42 हजार क्विंटल चावल राइस मिलर जमा करा चुके हैं। वहीं धान के उठाव में भी गति नहीं आने से फड़ों में आने वाले दिनों में जाम की स्थिति बन सकती है।

 

महासमुंद जिले में कस्टम मिलिंग के लिए अब तक 161 राइस मिलर पंजीयन करा चुके हैं। जिला विपणन अधिकारी सुनील राजपूत ने बताया कि इस बार कस्टम मिलिंग के लिए जिले के 173 राइस मिलरों ने आवेदन दिया था। इसमें से 167 राइस मिलरों को मिलिंग की अनुमति दी गई है। छह राइस मिलरों का पंजीयन शेष है। धान का उठाव भी शुरू हो गया है। उठाव के लिए 5 लाख 38 हजार क्विंटल का डीओ कट चुका है। वहीं ३ लाख 26 हजार क्विंटल धान का उठाव मिलिंग के लिए हो चुका है।

 

वहीं मिलरों ने विभाग में मात्र ४२ हजार क्विंटल चावल जमा किया है। ढाई लाख से अधिक क्विंटल धान की मिलिंग शेष है। यदि मिलिंग कार्य में तेजी नहीं आई तो कार्य का बोझ बढ़ जाएगा। इसके अलावा जिले के धान खरीदी केंद्रों में धान के उठाव की गति भी धीमी है। इससे आने वाले दिनों में परेशानी बढ़ सकती है। पिछले वर्ष उठाव में देरी होने के कारण अंतिम दौर में मौसम खराब होने से नुकसान का सामना करना पड़ा था।

 

इधर, धान खरीदी केंद्रों से धान का परिवहन करने वाले वाहनों में अब तक जीपीएस सिस्टम नहीं लगा है। इससे विभाग के अफसरों को जानकारी नहीं मिल रही है। जिला विपणन अधिकारी का कहना है कि ज्यादातर वाहन किराए के होते हैं। जीपीएस लगाने में खर्च अधिक आता है। इसलिए जीपीएस सिस्टम लगाने में ढील दे दी गई है। 

अब तक 27 हजार किसानों ने बेचा धान

 

29 दिनों में जिले में 27 हजार 158 किसानों ने 12 लाख 48 हजार 537 क्विंटल धान बेचा है। धान का भुगतान और बोनस की राशि किसानों के खाते में जमा करा दी गई है। जानकारी के मुताबिक इस वर्ष मार्कफेड को 6.5 मिट्रिक टन खरीदी का लक्ष्य मिला है। जिले में 122 धान उपार्जन केंद्रों में धान की खरीदी की जा रही है। 1 लाख 17 हजार किसानों ने धान बेचने के लिए अपना पंजीयन कराया है। कई किसान कर्जमाफी की आस में अपना धान नहीं बेच रहे हैं। इसके चलते केंद्रों में धान की आवक कम हो गई है।



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