छत्तीसगढ़

सरकारी स्कूल के शिक्षक ने 13 साल मेहनत कर स्कूल कैम्पस में बिखेर दी हरियाली, बच्चे पढ़ाई में भी अव्वल

By: डीएनए न्यूज़ रोहन सिन्हा
2018-11-27 08:28:17 PM
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सरकारी स्कूल के शिक्षक ने 13 साल मेहनत कर स्कूल कैम्पस में बिखेर दी हरियाली, बच्चे पढ़ाई में भी अव्वल

राजनादगांव: जिला मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर की दुरी पर स्थित ग्राम सीताकसा जो  खुज्जी विधानसभा क्षेत्र के छुरिया ब्लॉक में आता है। यहाँ पर राज्य सरकार के अधीन प्राथमिक शाला के शिक्षक प्रीतम कोठारी  है । उक्त स्कूल में हमने पहुंचकर पड़ताल किया गया। डोंगरगढ़ से सुबह 8 बजे से ही पड़ताल करने निकल पड़े। मै देश के गैर सरकारी संगठन MCCR के सदस्य होने के नाते  और मेरे पत्रकार साथी दैनिक भास्कर के रिपोर्टर खूबचन्द चौधरी के साथ रवाना हुए। MCCR, देश में बच्चो के अधिकार को लेकर काम करती  है । स्कूल परिसर को चारो ओर निहारते हुए देखे तो ऐसा लगा मानो हम किसी प्राइवेट स्कूल में आ गए। जबरदस्त वातावरण में पहुचने के बाद हमारी मुलाकात शिक्षक प्रीतम कोठारी जी व जनभागीदारी के सदस्य से हुईं। जहाँ पर हम दोनों का अभिवादन किया। हमारे साथी पत्रकार ने भी अभिवादन स्वीकारते हुए परिचय कराया। जैसे ही क्लास के  अंदर गए उपस्थित बच्चो ने ताली बजाकर स्वागत किया। फिर क्या हम दोनों ने बच्चो से अपने यहां आने का कारण बताया। साथी पत्रकार खूबचंद चौधरी ने बच्चो से उनके ही भाषा में सामान्य ज्ञान के सवाल बच्चों से पूछे। जिसका जवाब फटाफट प्राइमरी स्कूल के बच्चों ने दिया। यहाँ अध्यनरत बच्चे पढ़ाई के अलावा अन्य गतिविधियों में भी अव्वल है। स्कूल पढ़ाई इतनी अच्छी है कि हर वर्ष एक बच्चे का चयन नवोदय के लिये होता है। स्कूल परिसर में एक छोटे पानी टंकी में दो बतख तैर रहे थे। जिन्हें देखते ही मन प्रफुल्लित हो जाता है। इसे भी हमने अपने कैमरे में कैद कर लिया। बच्चो के साथ हमने स्कूल परिसर के चारो ओर मुआयना किया। परिसर का अवलोकन कर बच्चों से बातचीत भी की। स्कूल में जबरदस्त हरियाली और बहुत बढ़िया गार्डन बनाया गया है। जहां एक से बढ़कर छोटे-छोटे गमलो पर एक से बढ़कर एक फूल  देखे जा सकते है। वातावरण ऐसा कि मानो सरकारी नही निजी स्कूल का हो। यहां के  बच्चो को शिक्षक श्री कोठारी  के द्वारा पंचमाक्षर से हिंदी व्याकरण की राह को  आसान बनाया। इसी तरीके से पढ़ाते है औऱ ये सब संभव हो पाया स्कूल के पदस्थ शिक्षक श्री प्रीतम कोठारी जी के जूनून व स्टाफ के सहयोग से हो पाया है। शिक्षक को राज्य सरकर के द्वारा कई अवार्ड से सम्मानित किया जा चुका है। सब कुछ जानने के बाद हमने बच्चों के साथ मध्यान भोजन का स्वाद चखा। वाकई क्या सात्विक भोजन था। राज्य सरकार की मध्यान भोजन योजना का सही तरह संचालन गुणवत्ता के साथ हो रहा है। कुल मिलाकर इस स्कुल की खासियत काबिले तारीफ है। निश्चित ही अगर इंसान के अंदर जूनून हो तो कुछ भी कर सकता है और कुछ करने के लिये सरकार का मुह ताकने की जरूरत नही पड़ती। ऐसे शिक्षक के जूनून को हम प्रणाम करते है।



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