महासमुन्द

कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, किया दीप दान

By: डीएनए न्यूज़ सरायपाली
2018-11-24 02:27:17 PM
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कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी, किया दीप दान

तालाब किनारे घरौंदे बनाकर किए पूजा पाठ-

सरायपाली. कार्तिक का पावन माह पूर्णिमा को समाप्त हो गया. माह भर तक सुबह स्नान करने वालों ने आज आस्था की डुबकी लगाई. बड़ी संख्या में महिलाओं एवं पुरूषों नें तालाबों में दीप दान करते हुए पूजा पाठ की. तालाब के मेढ़ पर घरौंदा बनाकर अपने परिवार के सुखी जीवन एवं सुख सम्पन्नता वैभव बनाए रखने के लिए मंगल कामना की. स्थानीय बस्ती तालाब में आज सुबह सड़क किनारे महिलाएं द्वारा बनाए गए घरौंदे आकर्षण का केंद्र रहे. मार्ग से जो भी लोग गुजरते, वे कुछ देर तक देखने के बाद ही आगे बढ़ते दिखे. पूरे अंचल में कार्तिक माह को लेकर श्रद्धालु कार्तिक पूराण, गीत भी सुनते रहे. जिसका समापन पूर्णिमा के दिन हो गया. अंचल में आंवला तरी के दिन महिलाएं रात्रि जागरण कर अगले दिन पूजा पाठ के साथ तालाबों में दीप दान किए. 

 

मान्यता है कि कार्तिक माह भर जो श्रद्धालु भोर के समय स्नान करते हैं उन्हें पुण्य की प्राप्ति होती है. जो लोग महीने भर नहीं पहुंच पाते वे अंतिम 5 दिन विशेष रूप से कार्तिक स्नान करते हैं. कई जगहों पर कार्तिक पुराण कथा भी पुराहितों, महिलाओं अन्य गायकों द्वारा सुनाया जाता है. जिसे बड़ी तन्मयता से श्रद्धालु सुनते हैं. आंवरा तरी की रात्रि जागरण के साथ कई जगहों पर धार्मिक आयोजन भी किया गया. स्थानीय बस्ती तालाब में भोर होते ही बड़ी संख्या में महिलाएं तालाब किनारे घरौंदा बनाते दिखे. घरौंदा बनाकर उसमें चावल, धान एवं अनाज, पुष्प, फल आदि चढ़ाकर घर की सुख समृद्धि की कामना की. 

 

कार्तिक माह के बारे में ज्योतिषाचार्य पं. नरेंद्र पाणिग्राही से पूछे जाने पर बताया कि कार्तिक माह सबसे पवित्र माह है. इस माह में सुर्योदय पूर्व स्नान करने से इसका लाभ मिलता है. कार्तिकेय एवं शिव परिवार की पूजा भी इस माह में की जाती है. मांस, मंदिरा के सेवन को वर्जित मानते हुए सात्विक भोजन को ही उत्तम माना गया है. पौराणिक मान्यता के अनुसार  आंवला, तुलसी, वृंदावती पूजन का विशेष महत्व है. दीप दान के बारे में उन्होने बताया कि प्रतिदिन दीप जलाकर पूजा की जाती है, जिसका विसर्जन पूर्णिमा के दिन दीप दान कर किया जाता है. खासकर महिलाओं द्वारा इसकी आराधना की जाती है. लेकिन पुरूष वर्ग भी इसमें बराबर सहयोग दे सकते है. परिवार की समृद्धि, शरीर स्वस्थ रहे, व्यापार व्यवसाय उन्नत बने, अंधकार दूर होकर ज्योतिर्मय बने इसके लिए दीप दान का विशेष महत्व है. 



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