छत्तीसगढ़

कर्जमाफी और समर्थन मूल्य के वादों का असर, ज्यादा दाम की आस में किसानों ने रोका धान

By: डीएनए न्यूज़ हेमन्त वैष्णव
2018-11-22 11:14:23 AM
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धान की आवक में इस कमी को राजनीतिक दलों के कर्ज माफी और धान के समर्थन मूल्य के वादों से जोडकऱ देखा जा रहा है

छत्तीसगढ़ में धान की सरकारी खरीदी 1 नवम्बर से ही जारी है। लेकिन सहकारी समितियों में बनाए गए 1995 खरीदी केंद्रों में लगभग सन्नाटा ही पसरा है। धान की आवक में इस कमी को विधानसभा चुनाव के दौरान राजनीतिक दलों के कर्ज माफी और धान के समर्थन मूल्य 2500 रुपए प्रति क्विंटल करने के वादों से जोडकऱ देखा जा रहा है।

 

पत्रिका न्यूज़ में छपी खबर के अनुसार मार्कफेड के आंकड़ों के मुताबिक अभी तक खरीदी केंद्रों में 1 लाख 43 हजार 970 किसानों ने 5 लाख 49 हजार 753 टन धान ही बेचा है। पिछले वर्ष की धान खरीदी के शुरुआती 20 दिनों की आवक से इसकी तुलना करें तो यह केवल 42 प्रतिशत है। पिछले वर्ष धान खरीदी की शुरुआत 15 नवम्बर से हुई थी। 5 दिसम्बर तक खरीदी केंद्रों में 3 लाख 16 हजार 976 किसानों ने 13 लाख 8 हजार 184 टन धान बेच दिया था। इसकी तस्दीक किसान भी कर रहे हैं। किसान नेता रूपन चंद्राकर बताते हैं कि कर्जमाफी और 2500 रुपए प्रति क्विंटल समर्थन मूल्य का वादा किसानों को धान बेचने से रोक रहा है।

हमें चिंता है कि अगर धान बेचा तो समिति कर्ज का पैसा काट लेगी। बाद में अगर कर्ज माफी हुई तो कहीं उनको नुकसान न हो जाए। चंद्राकर का कहना है कि अभी तक तो यह होता रहा है कि अदा किया हुआ कर्ज कभी माफ नहीं हुआ है। उन्होंने कुछ धान बेचा है, लेकिन ऐसे खाते का जिसपर कर्ज नहीं था। परसदा गांव के राजकुमार साहू इसकी तस्दीक करते हैं। साहू का कहना है कि अभी उनकी धान नहीं कटा है, लेकिन कट भी जाता तब भी वे थोड़ा ही धान बेचते।

मजबूरी में बिक रहा है धान

रूपन चंद्राकर बताते हैं कि कई किसान मजबूरी में धान बेच रहे हैं। इसमें वे लोग अधिक हैं, जिन्होंने साहूकारों से कर्ज लिया है। कर्ज चुकाने के दबाव में वे मंडी में धान बेच रहे हैं, जहां महज 1400 रुपए प्रति क्विंटल की कीमत मिल रही है। उन्हें कोई बोनस भी नहीं मिलेगा।

 

राजनीतिक दलों ने यह कहा कांग्रेस का असर

प्रदेश किसान कांग्रेस के अध्यक्ष चंद्रशेखर शुक्ला ने बताया कि निश्चित ही यह कांग्रेस का असर है। किसानों ने खरीदी केंद्रों से टोकन ले लिया है, लेकिन केंद्र पर धान नहीं ले जा रहे हैं। दशहरा-दिवाली के त्योहार पहले ही निकल गए हैं। शादियों का मौसम जनवरी से है। ऐसे में किसानों को फसल बेचने की कोई जल्दी भी नहीं है। किसान नई सरकार का इंतजार कर रहे हैं।

चुनाव से आवक कम

भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष पूनम चंद्राकर ने बताया कि शुरुआती दिनों में धान की आवक ठीकठाक रही। जैसे-जैसे चुनाव का समय नजदीक आता गया, ग्रामीणों की सहभागिता चुनाव में ज्यादा बढ़ गई। इससे यह कमी हुई है। उसका कांग्रेस के वादों से लेना-देना नहीं है। कांग्रेस के सीमांत किसानों की कर्जमाफी की बात से किसान प्रभावित होने वाला नहीं है।

किसानों के लिए यह है वादा

कांग्रेस

10 दिनों के भीतर किसानों का संपूर्ण कर्ज माफ।

2500 रुपया धान का समर्थन मूल्य। दो वर्ष के बकाया बोनस भी।

मक्का, चना, सोयाबीन और गन्ना का समर्थन मूल्य बढ़ेगा।

मनरेगा को कृषि और बागवानी से जोड़ा जाएगा।

सिंचाई का रकबा दोगुना किया जाएगा।

भाजपा,

60 वर्ष से अधिक उम्र के लघु, सीमांत और कृषि मजदूरों को एक हजार रुपए पेंशन।

पांच वर्षों में 2 लाख नए पंप कनेक्शन।

दलहन और तिलहन की भी एमएसपी पर खरीदी।

सिंचाई का रकबा 50 प्रतिशत तक बढ़ाने की कोशिश।

‘कांग्रेस के घोषणा पत्र का असर नहीं’

मुख्यमंत्री ने दो दिन पहले कहा था कि कर्नाटक के किसानों को छलने के बाद कांग्रेस अब छत्तीसगढ़ के किसानों को छलने का काम कर रही हैं। केवल भाजपा की सरकार ही धान का समर्थन मूल्य 2600-2700 रुपए प्रति क्विंटल कर सकती है। कांग्रेस की घोषणा का किसानों पर कोई असर नहीं पड़ा है। मंडियों में धान लगातार आ रहा है।

कर्ज की रकम न काटने का आवेदन

दुर्ग जिले की कुछ समितियों में किसानों ने धान की कीमत से कर्ज की रकम नहीं काटने का आवेदन देना शुरू किया है। उनका कहना है कि वे लोग मार्च तक कर्ज अदा कर देंगे, तब तक उनके धान की पूरी कीमत दी जाए। बताया जा रहा कई समितियां ऐसा आवेदन लेने से इनकार कर चुकी हैं।

 

प्रगतिशील किसान संगठन के संयोजक राजकुमार गुप्त ने कहा, उपभोक्ता की बिना लिखित सहमति खाते से रकम काट लेना बैंकिंग कानून का उल्लंघन है। खरीफ के कर्ज को मार्च माह तक जमा किया जा सकता है। ऐसे में नवम्बर में ही कर्ज की राशि वसूल करना, वह भी जब नई सरकार किसानों का कर्ज माफ कर सकती है, उचित नहीं है। इससे किसानों को करोड़ों रुपयों का नुकसान हो सकता है। संगठन ने केंद्रीय सहकारी बैंक को एक पत्र भी लिखा है। राजकुमार गुप्त ने बताया कि इन परिस्थितियों पर विचार करने के लिए गुरुवार को एक बैठक बुलाई गई है।



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