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सरकार सख्त, विपक्ष दक्ष, और बीच में जनता स्तब्ध।

By: Roshan kumar
2018-11-10 11:01:28 PM
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अब क्या बताए महोदय, एक समय में भारत की राजनीति को सच्चा साथी मानने वाले हम  अब भारतीय राजनीति से कोशो दूर भागे आये हैं। अब किया कहे आज कि राजनीति के बारे में कुछ कहेंगे तो आप कहोगे बहुत बोलता है, ये पूरा राजनीति जनता है क्या ? इस लिए चुप रहने की आदत डाल लिए हम क्यूँ खाम-खा अपनी बेज्जती कराए हम, असलीयत में देखे तो देश में राजनीति के नाम पर लोगो से पंचनामा कराया जा रहा है वो भी उनके शोषण का। बस पाँच साल में हर बार की तरह जो पसंद आये उस पर अंगुठा लगाओ। ऎसा लगता है जैसे वोट देना जनता की मजबूरी बन गयी है। माँफ करियेगा साहब, लेकिन आज कि जनता को खुद ही सही से नहीं पता कि वो हर पाँच साल में अपने गली मोहल्ले का ठेका किसी दूसरे को क्यों सौपते हैं। बस हर साल की तरह शाम को बिजली बिल का भुगतान कर अगले सुबह चुनाव वाले दिन वोट देने लाइन में लग जाते हैं पूछो तो कहेंगे, लेकिन साहब वोट देना तो हमारा अधिकार है इसलिये हम वोट देते हैं ।



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