राजनीति

नांदगांव, डोंगरगांव, मोहला-मानपुर में सीधा मुकाबला 3 विधानसभा क्षेत्रों में त्रिकोंणीय मुकाबले के आसार

By: रोहन सिन्हा/ डोंगरगढ़ (राजनांदगांव)
2018-10-30 08:16:11 PM
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राजनांदगांव 30 अक्टूबर 2018। विधानसभा चुनाव 2018 का आगाज हो चुका है तथा पहले चरण के चुनाव में 12 नवंबर को अर्थात दीपावली के 5 दिन बाद जिले के सभी 6 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान संपन्न होगा जबकि मतगणना 11 दिसंबर को होगी। इस बार कांग्रेस ने 4 विधानसभा क्षेत्रों में नए उम्मीदवारों को चुनाव मैदान में उतारा है जिसमे राजनांदगांव से करुणा शुक्ला, खुज्जी से छन्नी साहू, डोंगरगढ़ से भुवनेश्वर बघेल तथा मोहला- मानपुर से इंद्र शाह मंडावी चुनाव मैदान में है। इसके अलावा डोंगरगांव से दलेश्वर साहू तथा खैरागढ़ से गिरवर जंघेल जो वर्तमान  विधायक हैं। को पुन: टिकट देकर उनके ऊपर विश्वास जताया है।

ये दोनों विधानसभा क्षेत्र जातिगत समीकरण से प्रभावित हैं। डोंगरगांव क्षेत्र में साहू मतदाताओं की बहुलता है जबकि खैरागढ़ क्षेत्र में लोधी मतोंं की अधिकता है।

डोंंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र

वैसे देखा जाए तो अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित डोंंगरगढ़ विधानसभा क्षेत्र में सतनामी मतों की संख्या लगभग 42 हजार  है। इस क्षेत्र में  महार मतदाताओं की भी खासी संख्या है जो कि बौद्धिष्ट मतावलम्बी है। भाजपा से श्रीमती सरोजनी बंजारे को  अपना प्रत्यासी बना कर मैदान में उतारा है वही कांग्रेस पार्टी भुनेस्वर बघेल को अपना प्रत्यासी बनाया है वर्तमान में जिला पंचायत सदस्य है यह क्षेत्र छजकां बसपा गठबंधन के तहत बसपा को मिला है अत: पूर्व में जो बौद्धिष्ट अनुयायी कांग्रेस तथा भाजपा के पक्ष में मतदान करते थे, इस बार इनके मत बहुजन समाज पार्टी से मिश्री लाल मार्कण्डेय  प्रत्याशी है और जनपद पंचायत का सदस्य भी है इस चुनाव को जितने के लिये जी जान एक कर दिए है कुछ निर्दलीय भी मैदान में है जो चुनावी खेल को बिगाड़ने ऒर बनाने के कोसिस में है

खुज्जी-खैरागढ़

इस स्थिति में  खुज्जी-खैरागढ़ की तरह त्रिकोंणीय मुकाबला होने के आसार बढ़ जायेंगे। खुुज्जी अर्थात चौकी-छुरिया विधानसभा क्षेत्र में भी साहू मतदाताओं की अधिक संख्या को देखते हुए कांग्रेस ने छन्नी साहू तथा भाजपा ने हीरेंद्र साहू को टिकट देकर उम्मीदवार बनाया है। यहां आदिवासी वोटरों की संख्या पर्याप्त है इस विधानसभा क्षेत्र में छजकां के प्रत्याशी जनरेल सिंह भाटिया को भाजपा के असन्तुष्ट पूर्व विधायक रजिंदर पाल भाटिया का अंदरूनी सर्मथन मिल रह है ऐसे जन चर्चा गर्म है  उपस्थिति के कारण यहां पर भी मुकाबला त्रिकोंणीय रहने की संभावना है।

छजकां ने यहां पर काफी पहले से जनरेल को अपना उम्मीदवार घोषित कर रखा है तथा वे लंबे अरसे से अपने क्षेत्र में चुनाव प्रचार में जुटे हुए हैं जनरेल सिंह आर्थिक रूप से भी सक्षम है तथा उनके पास कार्यकर्ताओं की पर्याप्त फौज है। जहां तक खैरागढ़ विधानसभा क्षेत्र की बात है तो छजकां ने  यहां से भी काफी पहले से देवव्रत सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित करके रखा है तथा पूर्व सांसद पूर्व विधायक होने के कारण देवव्रत  चुनाव प्रबंधन में अब तक अग्रणी हैं। देवव्रत सिंह की दमदार  उपस्थिति के कारण यहां पर भी त्रिकोंणीय मुकाबले के आसार हैं। देखना यह है कि देवव्रत सिंह लोधी मतदाताओं पर किस हद तक सेंध लगा पाते हैं। यहां पर गिरवर जंघेल कांग्रेस के विधायक हैं। तथा कोमल जंघेल (भाजपा) को पूर्व चुनाव में पराजित करके विधायक बने हैं।

खैरागढ़ से डॉक्टर रमन सिंह के नजदीकी तथा जनपद पंचायत के निविरोध अध्यक्ष विक्रांत सिंह टिकट के प्रबल दावेदार थे। उनकी खैरागढ़ के अलावा छुईखदान एवं गंडई क्षेत्र में भी अच्छी पकड़ रही है विक्रांत सिंह को मुख्यमंत्री का निकटस्थ रिश्तेदार होने के अलावा क्षेत्र में लोधी वोटरों की बहुलता के कारण टिकट से वंचित  रहना पड़ा है। देखना यही है कि उनकी नाराजगी भाजपा के लिए कहीं भारी न पड़ जाए। यहां पर गिरवर जंघेल से नाराज मतदाताओं के वोट भाजपा के अलावा देवव्रत सिंह को मिल सकते हैं। यहां पर त्रिकोंणीय मुकाबला काफी  दिलचस्प तथा रोचक रहने की संभावना है।

डोंगरगांव विधानसभा क्षेत्र

अब आगे डोंगरगांव विधानसभा क्षेत्र की ओर. यहां से कांग्रेस के दलेश्वर साहू विधायक है। उन्होंने वर्ष 2013 के चुनाव में भाजपा के दिनेश गांधी को 1698 मतों के अंतर से पराजित किया था। दलेश्वर साहू को 67755 मत तथा दिनेश गांधी को 66057 मत मिले थे। वस्तुत: दिनेश गांधी को मिले वोटों में से अधिकांश वोट दिनेश गांधी के न होकर कैडर आधारित भाजपा के थे। यहां से इस बार भाजपा ने अपने लोकप्रिय नेता  तथा नगर निगम के महापौर मधुसूदन यादव को उम्मीदवार बनाया है। डोंगरगांव क्षेत्र ऐसे चुनिंदा क्षेत्रों में से एक है जहां भाजपा का मुकाबला सीधे कांग्रेस प्रत्याशी से होगा। यहां से गठबंधन के तहत बहुजन समाज पार्टी ने भी अपना प्रत्याशी खड़ा किया है लेकिन इस क्षेत्र में बहुजन समाज पार्टी का कोई जनाधार नहीं था लेकिन जोगी कांग्रेस के नेता असोक वर्मा को बहुजन समाज पार्टी ने अपना उम्मीद्वार बना कर चुनाव को रोचक बना दिया है क्योकि लोधी मतदाता पर सीधा प्रभाव डाल सकता है असोक वर्मा लोधी समाज के नेता भी है और जनता कांग्रेस के जिला अध्यछ नवीन अग्रवाल तन मन धन से बसपा को जिताने की कोसिस में लग गया है अपने टीम के साथ ।

देखा जाए तो चुनाव लडऩे के लिए मधुसूदन यादव का डोंगरगांव पसंदीदा क्षेत्र रहा है तथा  सांसद रहते उन्होंने क्षेत्र का पर्याप्त दौरा किया था। इसके अलावा राजनंादगांव का महापौर रहने के दौरान भी मधुसूदन यादव की डोंगरगांव क्षेत्र में आमद तथा सक्रियता बनी हुई थी। वैसे दिलचस्प तथ्य यह भी है कि डोंगरगांव से मधुसूदन यादव के नाम की घोषणा होने पर मधुसूदन यादव को देर रात्रि अपने समर्थकों को पटाखे फोडऩे के लिए भेजना पड़ा था। तब दावेदारों तथा उनके समर्थकों ने पटाखे फोडऩे में दिलचस्पी नहीं दिखलाई। इससे स्पष्ट प्रतीत होता है कि मधुसूदन यादव को यहां से टिकट मिलने पर दावेदार नाखुश है। अत: मधुसूदन  यादव को दावेदारों पर अधीक भरोसा न करने अपने बलबूते, अपने समर्थकों के साथ चुनाव प्रचार करना होगा तभी विजयश्री उनके कदम चूम सकती है। जहां तक कांग्रेस के दलेश्वर साहू की बात है तो उन्होंने कम वोटों (1698) मतों के अंतर से दिनेश गांधी को पराजित किया था। जिससे स्पष्ट हो जाता है कि साहू बहुल मतदाताओं ने उनका पूरी तरह से साथ नहीं दिया अन्यथा कम से कम पांच-सात हजार मतों के अंतर से उनकी जीत अवश्य होती। स्पष्ट प्रतीत होता है कि दलेश्वर साहू को इस बार के चुनाव में कड़ी मेहनत करना होगा तभी उनकी नैया पार लग पाएगी।

मोहला-मानपुर

अब आए अनुसूचित जनजाति के लिए जिले में एकमात्र आरक्षित मोहला-मानपुर क्षेत्र की ओर. जहां पर कांग्रेस नेता  तेज कुंवर नेताम ने अपने पति पूर्व विधायक गोवर्धन नेताम के पूर्व संपर्कों का लाभ मिला लेकिन तेजकुंवर नेताम ने भाजपा के भोजेस शाह को मात्र 958 मतों के अंतर से पराजित किया था। इस बार के चुनाव में कांग्रेस तथा भाजपा दोनों ने नए उम्मीदवार को चुनाव मैदान में उतारा है। कांग्रेस में मोहला-मानपुर विधानसभा क्षेत्र से पूर्व आबकारी अधिकारी इंद्र शाह मंडावी को टिकट दिया है। वे राजनीति में भले ही गए हों लेकिन धनबल से संपन्न है।

भाजपा से पूर्व जिला पंचायत सदस्य  तथा वर्तमान जनपद सदस्य कंचनमाला भूआर्य प्रत्याशी हैं। वे औंधी क्षेत्र की निवासी है तथा राजनीति की पुरानी खिलाड़ी होने के अलावा राजनीतिक रूप से काफी परिपक्व भी हैं। इस विधानसभा क्षेत्र में आदिवासी गोंढ़ तथा हलबा जाति के मतदाताओं की संख्या बहुत अधिक है। जहां से संजीत ठाकुर भी चुनाव मैदान में है तथा क्षेत्र में काफी समय से अपनी सक्रियता बनाए हुए हैं लेकिन कैडर विहीन पार्टी होने के कारण संजीत ठाकुर को अपनी तमाम सक्रियता के बावजूद चुनाव में दातों तले चबाने पड़ सकते हैं। यहां छजकां आप तथा समाजवादी पार्टी अपना प्रभाव छोडऩे में नाकाम रहेंगे अंत: मुख्य मुकाबला कांग्रेस तथा भाजपा प्रत्याशी के बीच ही होगा। जहां तक हार-जीत की बात है तो अभी चुनाव प्रचार के प्रारंभिक चरणों में किसकी जीत-हार होगी, यह कहना जल्दबाजी होगी। उस स्थिति में तो और भी जबकि दोनों दलों के प्रत्याशी फ्रेश हैं तथा पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रहे हैं फिर भी कंचनमाला भूआर्य राजनीतिक रूप से परिपक्व होने के कारण उन्हें इसका लाभ अवश्य मिलने की संभावना है।



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