ख़बर का असर

DNA NEWS का बड़ा असर: आधी रात गांव पहुंचे अफसर, भाजपा-कांग्रेस के प्रचार-प्रसार लेखन को मिटाने देर रात जुटे रहे सीईओ

By: डीएनए न्यूज़। छत्तीसगढ़
2018-10-17 01:01:03 PM
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17 अक्टूबर 2018 महासमुंद/बसना :  कल शाम 7:00 बजे डीएनए न्यूज़ ने दिखाया था कि कैसे भाजपा और कांग्रेस नेताओं द्वारा आचार संहिता का उल्लंघन किया जा रहा है। जिसका उजागर डीएनए न्यूज़ ने किया। जिसमें अधिकारियों की कार्य मे लापरवाही भी सामने नजर आई।

डीएनए न्यूज़ ने जब पड़ताल की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने नजर आए। राज्य में विधानसभा चुनाव होंने है। टिकिट के तैयारी में जुटे भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशी अपने आप को उम्मीदवार बताकर कर कैसे आचार संहिता के नियमों की धज्जियां उड़ाई गई...और गांव के दीवारों में राजनीतिक पार्टियों के लेखन चमकते नजर आए।
 इस पूरे मामले को डीएनए न्यूज़ ने उठाया तो अधिकारियों में हड़कंप मंच गया और आनन-फानन में अधिकारी एक दूसरे पर दोषारोपण करने लगे जिसके पश्चात डीएनए न्यूज़ ने कार्यपालन मजिस्ट्रेट एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी बसना को अवगत कराया। पंचायत स्तर का  मामला होने के कारण सीईओ ने त्वरित संज्ञान लेते हुए सचिव को  जमकर फटकार लगाया.. वही जब सीईओ को जिले स्तर से निर्देश मिला तो देर रात तक ग्राम गुढ़ियारी में उपस्थित होकर को मिटवाया गया।

डीएनए न्यूज़ ने उठाया था मामला

आपको बता दें कि डीएनए छत्तीसगढ़ न्यूज ने कल 16 अक्टूबर को भाजपा-कांग्रेस के प्रचार प्रसार में लगे दीवारों के लेखन मामले में जब अधिकारियों को फोन घुमाया तो हड़कंप मच गया। कारण साफ था राज्य समेत जिले में आदर्श आचार संहिता लागू है। और अधिकारियों के लापरवाही से आचार संहिता के नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही थी। जिसे DNA NEWS ने उजागर किया।

खबर के 1 घंटे बाद दिखने लगा असर 

बताया जा रहा है कि सीईओ को उच्च अधिकारी ने फोन किया तो दीवारो के लेखन मिटाने हेतु निर्देश दिये गए। वहीं  दीवारों के लेखन मिटाने के लिए सीईओ राजेन्द्र वर्मा गुढ़ियारी ग्राम पहुंचे तो दीवारों के लेखन देखकर चौक गए। आनन फानन में दीवारों से लेखन मिटाने के लिए भाजपा-कांगेस के लेखन को मिटाया गया। रात्रि के लगभग 1 बजे रात तक ग्राम में उपस्थित होकर कार्य करवाया गया। 

दिग्गज नेताओं पर कार्रवाई होगी या...?

गौरतलब है कि 8 अक्टूबर को अवैध होडिंग, बैनर, पोस्टर एवं दिवाल में लिखे गए प्रचार प्रसार नारा लेखन को हटाने हेतु संपत अग्रवाल, डीसी पटेल, पुरंदर मिश्रा, उषा पटेल, संकल्प दास, त्रिलोचन नायक समेत अन्य को ज्ञापन जारी हुआ। पत्र में स्पष्ट लिखा था कि प्रचार-प्रसार सामग्री नही हटाने पर निर्वाचन नियमों के तहत कार्रवाई होगी। जिसके बाबजूद गांव के दीवारों में लेखन नजर आये।
अब देखना यह है कि दिग्गज नेताओं पर प्रशासन द्वारा क्या कार्रवाई की जाती है यह प्रश्न का विषय है?



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