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जानिये नौ देवियों के नौ भोगों के बारे में.. डोंगरगढ़ के मुख्य पुजारी ने 'DNA NEWS' से की चर्चा

By: रोहन सिन्हा / डोंगरगढ़ (राजनांदगांव)
2018-10-11 11:33:43 PM
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डीएनए न्यूज़ राजनांदगांव/डोंगरगढ़:  माँ बम्लेश्वरी देवी मंदिर डोंगरगढ के मुख्य पुजारी पंडित युवराज शर्मा ने DNA CHHATTISGARH NEWS से चर्चा के दौरान बताया की नौ दिनों में व्रत रखने वालों के लिए कुछ नियम होते हैं। मां दुर्गा के 9 स्वरूपों को अलग भोग चढ़ता है. तो आइये जानते हैं इन नौ देवियों के अलग नैवेद्यों के बारे में...

प्रथम नवरात्रि
प्रथम नवरात्री में मां शैलपुत्री की आराधना की जाती है. मां शैलपुत्री को सफेद चीजों का भोग लगाया जाता है और अगर यह गाय के घी में बनी हों तो व्यक्ति को रोगों से मुक्ति मिलती है और हर तरह की बीमारी दूर होती है.

द्वितीय नवरात्रि
द्वितीय नवरात्री में मां ब्रह्मचारिणी की आराधना की जाती है. मां ब्रह्मचारिणी को मिश्री, चीनी और पंचामृत का भोग लगाया जाता है. इन्हीं चीजों का दान करने से लंबी आयु का सौभाग्य भी पाया जा सकता है.

तृतीय नवरात्रि
तृतीय नवरात्री में मां चंद्रघंटा की आराधना की जाती है. मां चंद्रघंटा को दूध और उससे बनी चीजों का भोग लगाएं और और इसी का दान भी करें. ऐसा करने से मां खुश होती हैं और सभी दुखों का नाश करती हैं.

चतुर्थ नवरात्रि
चतुर्थ नवरात्री में मां कुष्मांडा की आराधना की जाती है. मां कुष्मांडा को मालपुए का भोग लगाएं. इसके बाद प्रसाद को किसी ब्राह्मण को दान कर दें और खुद भी खाएं. इससे बुद्धि का विकास होने के साथ-साथ निर्णय क्षमता भी अच्छी हो जाएगी.

पंचम नवरात्रि
पंचम नवरात्री में मां स्कंदमाता की आराधना की जाती है. पंचमी तिथि के दिन पूजा करके भगवती दुर्गा को केले का भोग लगाना चाहिए और यह प्रसाद ब्राह्मण को दे देना चाहिए. ऐसा करने से मनुष्य की बुद्धि का विकास होता है.

षष्ठी नवरात्रि
षष्ठी नवरात्री में मां कात्यायनी की आराधना होती है. षष्ठी तिथि के दिन देवी के पूजन में मधु का महत्व बताया गया है. इस दिन प्रसाद में मधु यानि शहद का प्रयोग करना चाहिए. इसके प्रभाव से साधक सुंदर रूप प्राप्त करता है.

सप्तमीं नवरात्रि
मां कालरात्रि की आराधना सप्तमी तिथि को की जाती है. इस दिन भगवती की पूजा में गुड़ का नैवेद्य अर्पित करके ब्राह्मण को दे देना चाहिए. ऐसा करने से व्यक्ति शोकमुक्त होता है.

अष्टमीं नवरात्रि
मां महागौरी की आराधना अष्टमी तिथि को की जाती है. इस दिन मां को नारियल का भोग लगाएं. नारियल को सिर से घुमाकर बहते हुए जल में प्रवाहित कर दें. मान्यता है कि ऐसा करने से आपकी मनोकामना पूर्ण होगी.

नवमीं नवरात्रि
मां सिद्धिदात्री की आराधना नवमी तिथि पर की जाती है. इस दिन मां को विभिन्न प्रकार के अनाजों का भोग लगाएं जैसे- हलवा, चना-पूरी, खीर और पुए और फिर उसे गरीबों को दान करें. इससे जीवन में हर सुख-शांति मिलती है।

 



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